BNT Desk: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर दर्ज लैंड फॉर जॉब घोटाले का मामला एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर है। यह केस बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में रहा है और इसे “नौकरी के बदले जमीन” घोटाला कहा जाता है। आज, 4 दिसंबर 2025, फैसला टल गया है और राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में अब 8 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाने का नया समय निर्धारित किया है।
मामले की गंभीरता
लालू परिवार के लिए यह मामला सिर्फ सियासी हलचल का विषय नहीं है, बल्कि कानूनी चुनौती भी है। आरोप है कि 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने ग्रुप-D नौकरियों के बदले जमीन ली। यह जमीन उनके परिवार या करीबी सहयोगियों के नाम पर ट्रांसफर की गई। सीबीआई की चार्जशीट में यह दावा किया गया है कि नियुक्तियां तय मानकों के खिलाफ की गई और कई लेनदेन बेनामी संपत्तियों के माध्यम से हुए। इस मामले में 100 से अधिक लोग आरोपी हैं, जिनमें लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटा तेजस्वी यादव भी शामिल हैं।
परिवार का रुख और राजनीतिक असर
लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने सभी आरोपों से इनकार किया है और इसे राजनीति प्रेरित कार्रवाई बताया है। 10 नवंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया था और तब से RJD और NDA दोनों खेमों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है। समर्थकों का कहना है कि आरोप साबित नहीं होंगे, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रहा है।
आगे का रास्ता
अब कोर्ट 8 दिसंबर को तय करेगा कि लालू परिवार के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा या नहीं। यह फैसला बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है और लालू परिवार की कानूनी लड़ाई का दिशा-निर्देश तय करेगा। इसलिए पूरे राज्य में लोग इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं।