BNT Desk: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले की सुनवाई के दौरान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने न केवल अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया, बल्कि कानूनी लड़ाई को अंत तक लड़ने का संकल्प भी जताया।
आरोपों को स्वीकार करने से इनकार
सोमवार को CBI द्वारा दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए। जब अदालत ने उनके सामने लगे आरोपों का जिक्र किया, तो लालू यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि वे निर्दोष हैं और उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
अदालत पर जताया भरोसा
लालू यादव ने सुनवाई के दौरान कहा, “मैं इन आरोपों को नहीं मानता और मुकदमे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।” उन्होंने भारतीय न्यायपालिका के प्रति अपना पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अंततः सत्य की जीत होगी। उनके इस बयान से साफ है कि वे इस मामले में किसी भी तरह के समझौते या नरमी के मूड में नहीं हैं और पूरी कानूनी प्रक्रिया से गुजरने को तैयार हैं।
खराब सेहत के बीच कानूनी जंग
75 वर्षीय लालू यादव पिछले काफी समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट और अन्य बीमारियों के बावजूद वे राजनीतिक और कानूनी मोर्चे पर सक्रिय हैं। उनकी बेटी मीसा भारती ने भी मीडिया से कहा कि लालू जी शारीरिक रूप से कमजोर जरूर हुए हैं, लेकिन उनका हौसला आज भी बुलंद है। कोर्ट ने उनकी सेहत का सम्मान करते हुए उन्हें फिलहाल व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद 2004-2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले लालू परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीनें ली गईं। सीबीआई इस मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिस पर अब ट्रायल शुरू होने वाला है।