BNT Desk: बिहार की न्याय व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही 300 नए अभियोजन पदाधिकारियों (प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर) की भर्ती करेगी। इन अधिकारियों की तैनाती निचली अदालतों में होगी, जहां वे सरकार की ओर से मुकदमे लड़ेंगे और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
जल्द भेजा जाएगा बहाली प्रस्ताव
गृह विभाग अगले एक-दो दिनों में इन पदों की बहाली का प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग को भेज देगा। प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगा। उम्मीद है कि पूरी चयन प्रक्रिया 4 से 6 महीनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी।
शुरुआत मजिस्ट्रेट कोर्ट से
चयनित अभियोजन पदाधिकारियों की शुरुआती तैनाती मजिस्ट्रेट कोर्ट में बेसिक ग्रेड पर होगी। यहां उन्हें करीब 7 साल तक काम करने का अनुभव मिलेगा। इसके बाद उन्हें सेशन कोर्ट और विशेष अदालतों जैसे पॉक्सो कोर्ट, एससी-एसटी कोर्ट और निगरानी कोर्ट में तैनात किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है बड़ी बहाली
करीब ढाई साल पहले राज्य में 500 अभियोजन पदाधिकारियों की बहाली हुई थी। फिलहाल ये सभी मजिस्ट्रेट कोर्ट में कार्यरत हैं। इनके साढ़े चार साल पूरे होने के बाद इन्हें भी सेशन कोर्ट और विशेष अदालतों में भेजा जाएगा, जहां ये बचाव पक्ष की दलीलों का मजबूती से जवाब देंगे।
स्पीडी ट्रायल पर सरकार का फोकस
सरकार का मुख्य उद्देश्य स्पीडी ट्रायल को बढ़ावा देना और गंभीर अपराधों में जल्द सजा दिलाना है। इससे अपराधियों को स्पष्ट संदेश मिलेगा कि अपराध करने पर बचने का कोई रास्ता नहीं है। सरकार चाहती है कि सिर्फ जेल भेजना ही नहीं, बल्कि सजा दिलाने की प्रक्रिया भी तेज हो।
अंडर ट्रायल कैदियों को राहत
पटना हाईकोर्ट के वकील प्रभात भारद्वाज के अनुसार, नई बहाली से अंडर ट्रायल कैदियों की संख्या में कमी आएगी। मामलों का निपटारा तेजी से होगा और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया और मजबूत होगी। आने वाले समय में सरकार और भी अभियोजन पदाधिकारियों की बहाली कर सकती है।