BNT Desk: पटना: राजधानी में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने आम जनजीवन को बेहाल कर रखा है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति पटना के बड़े सरकारी अस्पतालों में देखने को मिल रही है। IGIMS और PMCH जैसे नामचीन अस्पतालों के बाहर मरीज और उनके तीमारदार खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। ठंडी हवाओं और ओस के बीच सैकड़ों लोग कंपकंपाते हुए इलाज के इंतजार में बैठे नजर आते हैं।
रैन बसेरा और अलाव की व्यवस्था नदारद
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े मेडिकल हब होने के बावजूद अस्पताल परिसरों के आसपास रैन बसेरा, अलाव या अस्थायी ठहरने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। कई मरीजों के परिजन जमीन पर चादर बिछाकर या प्लास्टिक शीट के सहारे रात काटने को मजबूर हैं। ठंड से बचने के लिए लोग आपस में सटकर बैठते दिख रहे हैं, जिससे बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
गरीब और दूर-दराज से आए मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज जिलों से इलाज के लिए आए मरीजों और उनके परिजनों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। निजी होटल या लॉज में रुकने की आर्थिक क्षमता न होने के कारण उन्हें अस्पताल के बाहर ही डेरा डालना पड़ता है। कई तीमारदारों का कहना है कि रातभर ठंड में जागकर मरीज की देखभाल करना मजबूरी बन गया है।
प्रशासनिक दावों की खुली पोल
सरकार और प्रशासन की ओर से हर साल ठंड के मौसम में अलाव और रैन बसेरों की व्यवस्था के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। राजधानी के सबसे बड़े अस्पतालों के बाहर ऐसी स्थिति गंभीर मानवीय लापरवाही को उजागर करती है और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है।