BNT Desk: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कैथवलिया गांव में मंगलवार को एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। सोमवार रात करीब 10:40 बजे जैसे ही दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग ‘विराट रामायण मंदिर’ पहुंचा, पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। चकिया-केसरिया मार्ग पर स्थित इस मंदिर में महादेव के दर्शन के लिए सुबह 8 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी। हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। लोग इस विशाल शिवलिंग को छूने और उसकी पूजा करने के लिए इतने उत्साहित थे कि जिसे जहां से रास्ता मिला, वह वहीं से मंदिर परिसर में घुस गया।
तमिलनाडु से बिहार तक का कठिन सफर
यह शिवलिंग कोई साधारण पत्थर नहीं है, बल्कि इसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम से बड़े ही जतन के साथ ट्रक पर लादकर लाया गया है। ट्रक पर रखे फटे हुए टायरों का ढेर खुद इस लंबी और कठिन यात्रा की कहानी बयां कर रहा है। 21 नवंबर को शुरू हुई यह यात्रा आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश होते हुए आखिरकार बिहार पहुंची है। 210 टन वजन वाले इस काले ग्रेनाइट के शिवलिंग को देखने के लिए युवाओं में सेल्फी लेने की होड़ मची रही। स्कूलों की छुट्टी होने के कारण बच्चों की भीड़ भी काफी ज्यादा देखी गई।
1008 शिवलिंगों की पूजा के बराबर मिलेगा फल
माना जा रहा है कि इस ‘सहस्त्रशिवलिंगम’ के अभिषेक से भक्तों को 1008 शिवलिंगों की पूजा के बराबर पुण्य मिलेगा। इसके अभिषेक की तैयारी भी बहुत भव्य है। आने वाली 17 जनवरी को पांच पवित्र नदियों (गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, कैलाश मानसरोवर और सोनपुर) के जल से इसका जलाभिषेक किया जाएगा। सबसे खास बात यह है कि शिवलिंग पर जल की वर्षा हेलीकॉप्टर के जरिए की जाएगी। यह नजारा देखने लायक होगा क्योंकि यह मंदिर 2030 तक बनकर तैयार होगा, जिसकी ऊंचाई 270 फीट और लंबाई 1080 फीट होगी।
भीड़ के आगे छोटी पड़ीं व्यवस्थाएं
लाखों की भीड़ उमड़ने के कारण व्यवस्थाएं भी चरमरा गईं। हालांकि मंदिर के प्राइवेट गार्ड मोर्चा संभाले हुए थे, लेकिन स्थानीय पुलिस की कमी साफ खली। पार्किंग की सही जगह न होने के कारण लोगों ने गाड़ियां सड़क किनारे ही खड़ी कर दीं, जिससे चकिया-केसरिया रोड पर घंटों लंबा जाम लगा रहा। मंदिर परिसर के बाहर मेले जैसा माहौल है, जहां खाने-पीने की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि 17 जनवरी को पूरे विधि-विधान के साथ इसकी स्थापना की जाएगी।