BNT Desk: मुजफ्फरपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। शहर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बार-बार फर्जी परीक्षार्थी पकड़े जा रहे हैं, लेकिन पुलिस इन घटनाओं के पीछे काम कर रहे बड़े नेटवर्क का खुलासा नहीं कर पा रही है। कई मामलों में पुलिस ने आरोपितों को पकड़ा जरूर है, लेकिन कार्रवाई उसी स्तर पर रुक जाती है और मामले आगे नहीं बढ़ पाते। फर्जी परीक्षार्थियों के सक्रिय होने से परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नीट और एसएससी परीक्षाओं में उजागर हुए मामले
नीट परीक्षा के दौरान मिठनपुरा थाना क्षेत्र के मालीघाट स्थित केंद्र से एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया था। वह असली उम्मीदवार की जगह परीक्षा देने आया था और पूछताछ में उसने यह बात स्वीकार भी की। इसी तरह एसएससी जीडी काउंसटेबल की परीक्षा में भी एक युवक दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने पहुंचा था। दोनों मामलों में प्रारंभिक कार्रवाई तो हुई, लेकिन जांच आगे बढ़ने के बजाय धीरे-धीरे ठंडी पड़ गई।
जांच की धीमी रफ्तार और लंबित केस
परीक्षा फर्जीवाड़े से जुड़े आधा दर्जन से अधिक केस अभी भी लंबित हैं। कई फाइलें महीनों से बिना किसी प्रगति के पड़ी हुई हैं। पुलिस ने कुछ मामलों में चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन बड़े रैकेट की पहचान और गिरफ्तारी के मामले में कोई सफलता नहीं मिल सकी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, फर्जी परीक्षार्थियों के पीछे ‘सॉल्वर गैंग’ की मजबूत पकड़ है, जो मोटी रकम लेकर असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने की व्यवस्था करते हैं।
बड़े गिरोह तक पहुंचने में पुलिस की असफलता
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार जांच कर रहे हैं, लेकिन अब तक किसी बड़े मास्टरमाइंड या गिरोह के सरगना तक नहीं पहुंच सके हैं। कई जरूरी कड़ियाँ समय रहते न जोड़ पाने से महत्वपूर्ण सुराग हाथ से निकल चुके हैं। परीक्षा फर्जीवाड़े की बढ़ती घटनाएँ इस बात की ओर इशारा करती हैं कि शहर में यह नेटवर्क काफी मजबूत हो चुका है और इसे खत्म करने के लिए तेज़ और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।