BNT, Desk: बिहार के दो प्रमुख क्षेत्रों, ताजपुर (समस्तीपुर) और बख्तियारपुर(पटना) को जोड़ने वाला बहुप्रतीक्षित पुल प्रोजेक्ट, जिसे ‘सम्राट अशोक पुल’ या अनौपचारिक रूप से ’ड्रीम प्रोजेक्ट’ कहा जाता है, पूरा होने से पहले ही ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए निराशाजनक है जो इस पुल के बनने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। पुल का निर्माण कार्य लगभग 90% से ज़्यादा पूरा हो चुका है, लेकिन अब अचानक काम रुकने से क्षेत्र की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। यह पुल उत्तर बिहार को सीधे दक्षिण बिहार से जोड़कर दूरी को मीलों कम करने वाला था।
क्या हुआ और क्यों रुका काम?
स्थानीय लोगों और प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पुल का मुख्य हिस्सा बनकर लगभग तैयार है, लेकिन अंतिम चरण के कुछ काम, खासकर अप्रोच रोड्स (पुल तक पहुंचने वाली सड़कें) और कुछ तकनीकी पेच के कारण काम रुक गया है। सूत्रों का कहना है कि समस्तीपुर की ओर अप्रोच रोड के लिए भूमि अधिग्रहण और पटना की ओर रेल लाइन पर ओवरब्रिज के निर्माण में कुछ नई बाधाएं सामने आई हैं। हाल ही में इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण अधिकारी के तबादले के बाद काम की गति धीमी हुई और अब यह लगभग रुका हुआ है।
स्थानीय राजनीति और जनता की मांग
इस पुल के निर्माण में देरी से स्थानीय राजनीति गरमा गई है। स्थानीय विधायक और विपक्षी दलों ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता था, लेकिन नौकरशाही की अनदेखी के कारण इसमें जानबूझकर देरी की जा रही है। स्थानीय निवासियों ने भी लगातार विरोध प्रदर्शन किए हैं और मांग की है कि सरकार तुरंत हस्तक्षेप करे और बचे हुए 10% काम को जल्द से जल्द पूरा कराए। उनका कहना है कि पुल के आधे-अधूरे निर्माण से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर पड़ रहा है।
आगे क्या? प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल इस बड़े प्रोजेक्ट के रुकने पर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। अधिकारियों ने सिर्फ इतना कहा है कि मामले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का रुका रहना बताता है कि कैसे बड़े विकास कार्यों में ज़मीनी स्तर पर छोटे-छोटे पेच बड़ी रुकावट बन जाते हैं। जनता अब बस यह जानना चाहती है कि इस ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर फिर से रौशनी कब पड़ेगी और यह पुल कब शुरू होगा, ताकि पटना और समस्तीपुर की दूरी सिमट सके।