18 वर्षों से दबे कोर्ट आदेश, पटना हाईकोर्ट ने थानेदार और आईओ को हाजिर होने का फरमान जारी किया

पटना हाईकोर्ट ने साहेबगंज थाना में 18 साल से दबाए गए अदालत के आदेशों पर थानेदार और मामले के आईओ को 12 दिसंबर को केस रिकॉर्ड सहित हाजिर होने का आदेश दिया। कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही की कड़ी जांच का फरमान सुनाया और आदेशों के पालन को सुनिश्चित करने को कहा।

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BNT Desk: पटना हाईकोर्ट ने साहेबगंज थाना में 18 वर्षों से अदालत के आदेश दबाकर न लागू करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने थानेदार और मामले के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (आईओ) को पूरा केस रिकॉर्ड लेकर 12 दिसंबर को हाजिर होने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय तक वारंट और कुर्की आदेश लागू न करने के पीछे पुलिस की लापरवाही की पूरी जांच की जाएगी।

पुराना मामला और दबाए गए आदेश

मामला 1997 में डकैती और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज है। पुलिस ने 2007 में आरोपी के खिलाफ कुर्की का आदेश हासिल किया था, लेकिन यह आज तक लागू नहीं किया गया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी के लिए वारंट जारी किया गया और इश्तेहार भी निकाला गया, फिर भी 18 वर्षों तक आदेशों को लागू नहीं किया गया। इस लंबी अवधि में आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हुई।

हाईकोर्ट की सख्त प्रतिक्रिया और आदेश

याचिकाकर्ता उमाशंकर सिंह ने अदालत में दावा किया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया और पुलिस ने आदेशों को दबाकर उनकी न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाली। हाईकोर्ट ने एसएसपी को आदेश की प्रति भेजने और थानेदार तथा आईओ को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया। अदालत ने साफ किया कि लंबी अवधि तक आदेश न लागू करने के कारणों की पूरी जानकारी मांगी जाएगी।

कानूनी और प्रशासनिक प्रभाव

यह मामला पुलिस की लापरवाही और अदालत के आदेशों के अनुपालन में विफलता को उजागर करता है। हाईकोर्ट का सख्त रुख यह संदेश देता है कि कानून के आदेशों का पालन न करने पर अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। अब पुलिस को अदालत में यह स्पष्ट करना होगा कि क्यों 18 साल तक कुर्की और वारंट आदेश लागू नहीं किए गए।

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