बिहार की ऐतिहासिक धरती वैशाली एक बार फिर पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई। सोमवार को महापरिनिर्वाण दिवस के मौके पर वियतनाम, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल समेत कुल 26 देशों के बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियाँ यहाँ पहुँचे। खास बात यह रही कि ये विदेशी मेहमान आलीशान गाड़ियों को छोड़कर कोल्हुआ पंचायत के वीरपुर गांव की कच्ची पगडंडियों पर चलते नजर आए। उन्हें अपने बीच पाकर स्थानीय ग्रामीण बेहद खुश थे और पूरे इलाके का माहौल भक्ति और शांति से भर गया।
प्रभातफेरी से गूंजा शांति का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत सोमवार सुबह एक भव्य ‘प्रभातफेरी’ के साथ हुई। यह यात्रा कोल्हुआ से शुरू होकर बखरा गांव तक निकाली गई। इस दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने करुणा, शांति और मैत्री (दोस्ती) के संदेश दिए। हाथ में झंडे और बुद्ध के विचार लिए जब ये विदेशी अनुयायी गांव की सड़कों से गुजरे, तो हर कोई उन्हें देखने के लिए घरों से बाहर निकल आया। इस प्रभातफेरी का मुख्य उद्देश्य दुनिया को हिंसा छोड़ प्रेम का रास्ता दिखाना था।
गौतमी टीला पर विशेष पूजा और प्रार्थना
प्रभातफेरी के बाद सभी श्रद्धालु वीरपुर गांव के ऐतिहासिक महाप्रजापति गौतमी टीला पहुँचे। वहां मौजूद प्राचीन बरगद के पेड़ के नीचे भगवान बुद्ध की मूर्ति स्थापित की गई और विधिवत पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद सामूहिक ध्यान और प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस मौके पर बौद्ध भिक्षुओं ने महाप्रजापति गौतमी के त्याग को याद किया और बताया कि कैसे उन्होंने बौद्ध संघ में महिलाओं को जगह दिलाने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया था।
विदेशी मेहमानों का भव्य स्वागत और सम्मान
इस खास मौके पर मुजफ्फरपुर की कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सुष्मिता कुमारी झा और कई सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। आयोजन समिति की ओर से सभी विदेशी मेहमानों को भगवान बुद्ध की छोटी प्रतिमा और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से न सिर्फ वैशाली की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती है, बल्कि यहाँ पर्यटन और रोजगार की नई संभावनाएं भी बढ़ती हैं।