बिहार में शिक्षकों के तबादले पर रोक, नई ट्रांसफर नीति बनाने के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित

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BNT Desk: बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने शिक्षकों के स्थानांतरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही ट्रांसफर की पूरी व्यवस्था में आमूल बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस फैसले का सीधा असर राज्य के करीब 5.87 लाख शिक्षकों पर पड़ेगा।

क्या है नई योजना?

सरकार पहली बार ‘शिक्षक-छात्र अनुपात’ को आधार बनाकर नई ट्रांसफर नीति तैयार करने जा रही है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी स्कूलों में शिक्षकों का संतुलित वितरण हो सके। अभी तक कई स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं, जबकि दूसरे स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। नई नीति इसी असंतुलन को दूर करने के लिए बनाई जाएगी।

इस प्रक्रिया को सरकार ने ‘समानुपातिकरण’ नाम दिया है। इसके तहत हर स्कूल के लिए एक ‘मानक मंडल’ तय किया जाएगा, जो यह निर्धारित करेगा कि उस विद्यालय में कितने शिक्षकों की जरूरत है। उसी आधार पर शिक्षकों का ट्रांसफर किया जाएगा।

यह व्यवस्था राज्य के लगभग 71 हजार प्रारंभिक विद्यालयों और 9,360 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्कूलों में लागू होगी।

उच्चस्तरीय कमेटी गठित, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

नई ट्रांसफर नीति का मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता शिक्षा सचिव करेंगे। इसमें प्राथमिक शिक्षा निदेशक, कोशी प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना के अधिकारी और माध्यमिक शिक्षा निदेशक सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

कमेटी को निर्देश दिया गया है कि वह 15 दिनों के भीतर नई नीति का ड्राफ्ट तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंपे। यह आदेश शिक्षा विभाग के उप सचिव अजय सतीश भंगरा के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।

नीति आने तक कोई ट्रांसफर नहीं

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक नई नीति औपचारिक रूप से लागू नहीं हो जाती, तब तक किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि फिलहाल ट्रांसफर की उम्मीद लगाए बैठे लाखों शिक्षकों को और इंतजार करना होगा।

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से शिक्षकों की कमी और अधिकता दोनों की समस्या एक साथ हल होगी। जिन स्कूलों में शिक्षक जरूरत से ज्यादा हैं, वहां से उन्हें कम शिक्षकों वाले स्कूलों में भेजा जाएगा। इससे छात्रों को बेहतर और संतुलित शिक्षा मिल सकेगी। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कमेटी 15 दिनों में कैसा ड्राफ्ट तैयार करती है और नई नीति कब से लागू होती है। शिक्षकों को उम्मीद है कि नई नीति पारदर्शी और न्यायसंगत होगी।

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