BNT Desk: बिहार पंचायत चुनाव को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव इस बार भी पुराने परिसीमन के आधार पर कराए जाएंगे। करीब 30 साल पुराने परिसीमन के अनुसार ही ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद की सीमाएं तय रहेंगी। बिहार में आखिरी बार पंचायत परिसीमन 1994–95 में 1991 की जनगणना के आधार पर हुआ था।
परिसीमन क्यों जरूरी और क्यों नहीं हुआ
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के अनुसार चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय करना, ताकि हर प्रतिनिधि लगभग समान आबादी का प्रतिनिधित्व करे। समय के साथ आबादी बदलती रहती है, इसलिए परिसीमन जरूरी होता है। लेकिन 2021 की जनगणना अब तक नहीं हुई है। सरकार के पास पंचायतों की नई आबादी का आंकड़ा नहीं है। ऐसे में अगर परिसीमन किया भी जाए, तो 2011 के पुराने आंकड़ों पर ही करना पड़ेगा, इसलिए सरकार ने परिसीमन नहीं कराने का फैसला लिया है।
कितने पदों के लिए होंगे चुनाव
राज्य में कुल 2 लाख 55 हजार 379 पदों के लिए पंचायत चुनाव होंगे। इसमें वार्ड सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और पंच शामिल हैं। सभी पदों के लिए वोटिंग ईवीएम से कराई जाएगी।
बदलेगा आरक्षण रोस्टर
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत बदला हुआ आरक्षण रोस्टर होगा। बिहार पंचायत राज अधिनियम के अनुसार हर दो चुनाव के बाद आरक्षण रोस्टर बदला जाता है। 2016 और 2021 में एक ही रोस्टर लागू था, इसलिए 2026 में नया रोस्टर आएगा। इससे कई सीटों की आरक्षण स्थिति बदल जाएगी।
आरक्षण का गणित
पंचायत चुनाव में कुल 50% सीटें आरक्षित होती हैं। एससी-एसटी को उनकी आबादी के अनुपात में, ईबीसी को करीब 20% आरक्षण मिलता है। इसके अलावा महिलाओं के लिए 50% आरक्षण तय है, यानी हर वर्ग में आधी सीटें महिलाओं के लिए होंगी।
नई तकनीक से होगा मतदान
पंचायत चुनाव के लिए 32 हजार से ज्यादा नई M-3 ईवीएम खरीदी जाएंगी। इन पर करीब 64 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये मशीनें एक साथ 384 प्रत्याशियों तक के लिए वोटिंग की सुविधा देंगी। हालांकि, इस बार भी VVPAT का इस्तेमाल नहीं होगा।
कम चरण, ज्यादा पारदर्शिता
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, 2026 का पंचायत चुनाव कम चरणों में कराया जाएगा। 100% वेबकास्टिंग, रियल टाइम रिपोर्टिंग और तकनीक के अधिक इस्तेमाल से चुनाव को और पारदर्शी बनाया जाएगा।