बिहार में गहराया वित्तीय संकट: वेतन-पेंशन छोड़ सभी भुगतान पर रोक, 10 मार्च तक केवल सैलरी और पेंशन के बिल होंगे पास

बिहार सरकार ने वित्तीय अनुशासन का हवाला देते हुए 10 मार्च 2026 तक कोषागार से केवल वेतन, पेंशन और मानदेय के भुगतान का आदेश दिया है। चुनावी रेवड़ियों और भारी खर्च के कारण अन्य सभी बिलों को फिलहाल रोक दिया गया है, जो राज्य में गंभीर आर्थिक तंगी का संकेत है।

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BNT Desk: वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि हर साल वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों, खासकर फरवरी और मार्च में, कोषागारों में बड़ी संख्या में विपत्र (बिल) जमा होते हैं। इनमें चालू योजनाओं से जुड़े बिल, आकस्मिक खर्च के बिल और पुराने दावों के बकाया बिल भी शामिल रहते हैं। एक साथ इतने अधिक बिल आने से उनकी सही तरीके से जांच और पास करने में कठिनाई होती है। इसके साथ ही कोषागार के सॉफ्टवेयर सिस्टम पर भी अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसलिए यह जरूरी है कि सभी बिलों की जांच नियमों के अनुसार सावधानीपूर्वक की जाए, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।

बिहार कोषागार संहिता के नियम

बिहार कोषागार संहिता, 2011 के नियम 176 और 177 के अनुसार, केवल बजट में राशि उपलब्ध होने के कारण धन निकासी नहीं की जा सकती। राशि की निकासी तभी की जानी चाहिए, जब वह तत्काल खर्च के लिए आवश्यक हो। वित्त विभाग ने 6 फरवरी 2026 को पत्रांक-1354 के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 में व्यय नियंत्रण और निधि निकासी को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनावश्यक खर्च न हो और बजट का सही उपयोग हो।

दिशा-निर्देश के बावजूद बढ़ रही संख्या

विभाग के अनुसार, पहले जारी निर्देशों के बावजूद कोषागारों में बड़ी संख्या में विपत्र जमा हो रहे हैं। इससे उनकी समुचित जांच में परेशानी हो रही है। यह स्थिति वित्तीय मानकों के अनुरूप नहीं मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो वित्तीय प्रबंधन में अव्यवस्था पैदा हो सकती है। इसलिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की गई।

10 मार्च 2026 तक विशेष व्यवस्था

इन परिस्थितियों को देखते हुए वित्त विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विशेष निर्णय लिया है। निर्देश के अनुसार, 10 मार्च 2026 तक कोषागार में केवल स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय मद से जुड़े बिल ही पारित किए जाएंगे। इसमें वेतन, पेंशन, सहायक अनुदान-वेतन और संविदा कर्मियों के मानदेय से संबंधित बिल शामिल हैं। यानी फिलहाल केवल जरूरी और अनिवार्य भुगतान ही किए जाएंगे। 10 मार्च के बाद अन्य बिलों की नियमों के अनुसार जांच की जाएगी और उचित पाए जाने पर उन्हें पास किया जाएगा।

सख्त अनुपालन का निर्देश

वित्त विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों से इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है। उद्देश्य यही है कि वित्तीय वर्ष के अंत में खर्च पर नियंत्रण रखा जा सके और राज्य में वित्तीय अनुशासन बना रहे।

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