BNT Desk: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने एक ऐसे बड़े खेल का खुलासा किया है, जिसने सरकार की नींद उड़ा दी है। राज्य में ऑफलाइन भू-लगाान रसीद काटने पर पूरी तरह पाबंदी होने के बावजूद कई जिलों में गुपचुप तरीके से पुरानी रसीदें काटी जा रही हैं। विभाग को इसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से किसी बड़ी ‘आपराधिक साजिश’ की बू आ रही है।
इन जिलों में मिला बड़ा फर्जीवाड़ा
सरकार की जांच में सामने आया है कि सहरसा, सुपौल, वैशाली, सीतामढ़ी और मोतिहारी जैसे जिलों में 30 अगस्त 2024 के बाद भी धड़ल्ले से ऑफलाइन रसीदें काटी गई हैं। यह मामला तब और भी हैरान करने वाला हो गया जब पता चला कि सुपौल जिले की रसीद बुक (वॉल्यूम) पहले ही सरकारी रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार) में जमा हो चुकी थी, फिर भी वहां से रसीदें कैसे कट गईं? इस खुलासे के बाद विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी डीएम और बड़े अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है।
आखिर क्यों लगी थी ऑफलाइन रसीद पर रोक?
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए विभाग ने 24 अप्रैल 2024 को ही एक आदेश जारी कर ऑफलाइन रसीदें काटने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। नियम यह था कि अब रयतों (जमीन मालिकों) को केवल ऑनलाइन भुगतान के बाद डिजिटल रसीद ही दी जाएगी। सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे अपनी पुरानी रसीद बुक 14 अगस्त 2024 तक जिला मुख्यालय में जमा कर दें। लेकिन कई कर्मचारियों ने इन किताबों को जमा करने के बजाय अपने पास ही रख लिया ताकि वे अवैध तरीके से पिछली तारीखों में रसीदें काट सकें।
लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज
इस गंभीर गड़बड़ी को देखते हुए विभाग ने अब सख्त रुख अपना लिया है। प्रधान सचिव ने आदेश दिया है कि जिन भी अधिकारियों या कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर रसीदें काटी हैं, उन्हें तुरंत चिन्हित कर उनके खिलाफ ‘अनुशासनिक कार्रवाई’ शुरू की जाए। सभी जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है कि उनके पास अभी कितनी रसीद बुक बची हैं और वे किसकी कस्टडी में हैं।
अच्छा काम करने वाले जिलों की भी हुई चर्चा
जहां एक तरफ कई जिलों में धांधली की खबरें हैं, वहीं भागलपुर, शेखपुरा, पूर्णिया और दरभंगा जैसे जिलों ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है। इन जिलों ने समय रहते अपनी सारी पुरानी रसीद बुक सरकारी रिकॉर्ड रूम में जमा करा दी हैं। भागलपुर के अपर समाहर्ता दिनेश राम ने बताया कि उनके जिले के सभी 16 अंचलों में अब केवल ऑनलाइन रसीदें ही काटी जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता बनी हुई है।