BNT Desk: बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बुधवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने अपने अंतिम फैसले में बिजली दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी से साफ इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि 1 अप्रैल से भी मौजूदा दरें ही प्रभावी रहेंगी और उपभोक्ताओं की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। बिजली कंपनी ने 35 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया था, जिसे आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया।
आयोग ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी ने बुधवार को यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। इस दौरान आयोग के सदस्य अरुण कुमार सिन्हा और परशुराम सिंह यादव भी मौजूद रहे। फैसला सुनाने से पहले आयोग ने सभी पक्षों की दलीलें बेहद ध्यान से सुनीं। बिजली कंपनी के वित्तीय आंकड़ों का गहन और विस्तृत विश्लेषण किया गया। तमाम पहलुओं पर विचार करने के बाद ही यह अंतिम निर्णय लिया गया, जो उपभोक्ताओं के हक में गया।
कंपनी मुनाफे में, इसलिए नहीं बढ़ी दरें
आयोग के फैसले की सबसे बड़ी वजह यह रही कि सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि बिजली कंपनी मुनाफे में चल रही है। जब कंपनी घाटे में न हो तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने का कोई औचित्य नहीं बनता। आयोग ने भी यही तर्क अपनाया और कहा कि ऐसी स्थिति में दरें बढ़ाना उपभोक्ता हित के विरुद्ध होगा। इसीलिए बिजली कंपनी के प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए दरें यथावत रखने का निर्णय लिया गया। यह फैसला सीधे तौर पर आम जनता की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
शहरी और ग्रामीण दरों में अब कोई भेद नहीं
इस फैसले की एक और बड़ी और सकारात्मक बात यह है कि आयोग ने शहरी और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के बीच दरों की असमानता को समाप्त कर दिया है। अब तक दोनों वर्गों के लिए अलग-अलग दरें लागू थीं, जिससे कई बार भ्रम और असंतोष की स्थिति बनती थी। अब एक समान दर लागू होने से यह असमानता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस कदम से विशेष रूप से शहरी उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा और उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी। विशेषज्ञ इसे बिजली वितरण व्यवस्था में समानता की दिशा में एक बड़े और जरूरी बदलाव के रूप में देख रहे हैं।
दो स्लैब हटाकर एक स्लैब की व्यवस्था
आयोग ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले बिजली बिल की गणना दो अलग-अलग स्लैब के आधार पर होती थी, जो कई उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक और जटिल थी। अब इन दोनों स्लैब को मिलाकर केवल एक स्लैब कर दिया गया है। इससे बिलिंग प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समझने में आसान हो जाएगी। उपभोक्ता अब बिना किसी उलझन के अपना बिजली बिल समझ सकेंगे। इस व्यवस्था से बिलिंग में होने वाली गड़बड़ियों और शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है।
किसे कितना मिलेगा सीधा फायदा
इस फैसले के बाद विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को अलग-अलग स्तर पर राहत मिलेगी। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को 1.53 रुपये प्रति यूनिट तक की राहत मिलेगी, जो सीधे उनके मासिक बिजली बिल में दिखाई देगी। शहरी व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 1.20 रुपये प्रति यूनिट की बचत होगी, जिससे छोटे और मझोले कारोबारियों को खासा फायदा मिलेगा। वहीं ग्रामीण व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 42 पैसे प्रति यूनिट सस्ती बिजली मिलेगी। कुल मिलाकर राज्य के लगभग 27 लाख उपभोक्ता इस फैसले से सीधे लाभान्वित होंगे।
उपभोक्ताओं में राहत का माहौल
आयोग के इस फैसले से राज्यभर में उपभोक्ताओं में राहत और खुशी का माहौल है। महंगाई के इस दौर में जब हर चीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, बिजली दरों का न बढ़ना आम परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है। उपभोक्ता संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और आयोग की सराहना की है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बिजली कंपनी इस फैसले को किस तरह लागू करती है और आने वाले समय में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।