BNT Desk: बिहार विधानसभा में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है। राजद विधायक कुमार सर्वजीत के एक बयान ने सदन से लेकर सड़क तक हंगामा खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है।
रामविलास पासवान पर बयान और बवाल
विवाद की शुरुआत राजद विधायक कुमार सर्वजीत के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दिवंगत नेता रामविलास पासवान का जिक्र किया। उन्होंने सदन में कहा कि अगर रामविलास पासवान आज जीवित होते, तो दलितों का अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करते। इस टिप्पणी को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायकों ने अपमानजनक माना और सदन के अंदर जोरदार हंगामा किया। विरोध इतना बढ़ा कि सड़क पर तेजस्वी यादव का पुतला भी फूंका गया।
भाई वीरेंद्र का पलटवार और ‘बेचारा’ शब्द पर सफाई
इस पूरे मामले पर राजद के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने अपनी पार्टी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ‘बेचारा’ शब्द का गलत अर्थ निकाल रहा है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि इस शब्द का इस्तेमाल केवल इस संदर्भ में किया गया था कि रामविलास पासवान जैसे कद्दावर नेता कभी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं बन सके। उनका इरादा किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक स्थिति पर अफसोस जताना था।
महंगाई और वेतन के मुद्दे पर सरकार को घेरा
भाई वीरेंद्र ने केवल स्पष्टीकरण ही नहीं दिया, बल्कि सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने चुनावी वादों को ‘जुमलेबाजी’ करार देते हुए कहा कि जो सरकार अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है, वह जनता को 10-10 हजार रुपये देने की बातें कैसे कर सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई चरम पर है और सरकार के पास जनता की समस्याओं का कोई समाधान नहीं है, इसलिए वह केवल बयानबाजी कर रही है।
सदन में आर-पार की जंग
राजद ने साफ कर दिया है कि वे इन मुद्दों पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। विपक्ष अब सरकार को घेरने के लिए ‘आर-पार’ के मूड में है। भाई वीरेंद्र के तेवरों से साफ है कि आने वाले समय में सदन की कार्यवाही में और भी बड़ा हंगामा देखने को मिल सकता है।