BNT Desk: बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र, जो कुल पाँच दिनों तक चला, शुक्रवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। यह सत्र छोटा जरूर था, लेकिन राजनीतिक बहस और तीखे तेवरों से भरा रहा। सदन के स्पीकर प्रेम कुमार ने गवेल बजाते हुए 18वीं बिहार विधानसभा के इस सत्र का समापन किया। उन्होंने सभी सदस्यों—चाहे सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के—को आने वाले नए वर्ष 2026 की शुभकामनाएँ दीं। स्पीकर ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली आत्मा मर्यादा, संयम और आपसी सम्मान में है और उन्हें उम्मीद है कि आगे भी यह परंपरा कायम रहेगी।
आख़िरी दिन भी जारी रही सियासी गरमाहट
सत्र के अंतिम दिन सदन का माहौल ऊर्जा और राजनीति से भरा रहा। सदन में हल्की–फुल्की नोक–झोंक, तीखे तंज़, और मुद्दों पर गंभीर बहस देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों, पूरक बजट, महंगाई और प्रशासनिक कमजोरियों को लेकर कड़े सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाए कि सरकार जनता के मुद्दों से दूर और फैसलों में असफल रही है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों का जोरदार जवाब देते हुए कहा कि सरकार विकास और जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दे रही है और विपक्ष बिना आधार के सवाल उठा रहा है।
स्पीकर का संदेश
समापन भाषण में स्पीकर प्रेम कुमार ने कहा: “मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, पर बहस और तार्किक विचार–विमर्श हमेशा तहज़ीब की सीमा में होना चाहिए। सीमित समय के बावजूद महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे करना हम सभी की सफलता है।” उन्होंने सभी दलों के योगदान और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
अगली गूंज 2026 में
इस शीतकालीन सत्र के खत्म होने के साथ ही यह इतिहास का हिस्सा बन गया है। अब सदन की अगली बैठक साल 2026 में नए मुद्दों, नए प्रस्तावों और नई सियासी गर्मी के साथ होगी।