BNT Desk: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के बीच शराबबंदी को लेकर राजनीतिक माहौल तेज हो गया है। बुधवार को सत्र का 12वां दिन था, जहां विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि वे ब्लड टेस्ट कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में शराबबंदी कानून सफल है और सभी को इसका पालन करना चाहिए।
जेडीयू विधायक का बयान
जेडीयू विधायक अजीत कुमार ने भी शराबबंदी का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू है और जो भी शराब के कारोबार में शामिल है, उस पर कार्रवाई की जाती है। कांग्रेस विधायक द्वारा ब्लड टेस्ट की बात किस संदर्भ में कही गई, यह वही स्पष्ट करें। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वे बेवजह बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार में किसी ने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
मंगलवार को आरएलएम विधायक माधव आनंद ने शराबबंदी की समीक्षा की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि इस कानून के फायदे और नुकसान का आकलन किया जाए। हालांकि उन्होंने शराबबंदी की सराहना भी की और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व की तारीफ की। वहीं एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने शराबबंदी को असफल बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में शराब की होम डिलीवरी हो रही है और कुछ लोगों को संरक्षण मिल रहा है। इसके बाद से यह मुद्दा और गरमा गया।
विपक्ष के आरोप
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने आरोप लगाया कि एनडीए के प्रभावशाली लोग ही शराब कारोबार में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बाहर से शराब मंगाई जा रही है। वहीं सीपीआई-एमएल विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि शराबबंदी पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब माफिया और सरकारी तंत्र के बीच सांठगांठ है।