बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रदेश की जेल व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने घोषणा की है कि राज्य की 21 जेलों में 44 नए आवासीय भवन बनाए जाएंगे। इस पूरी परियोजना पर कुल 88 करोड़ 89 लाख 76 हजार रुपये खर्च होंगे और इसका कार्यान्वयन वित्तीय वर्ष 2025-26 से शुरू होगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद कारा अधिकारी जेल परिसर के भीतर ही बने आवासीय भवनों में रह सकेंगे।
बी-टाइप (G+3) भवन होंगे निर्मित
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्मित किए जाने वाले सभी आवासीय भवन बी-टाइप (G+3) श्रेणी के होंगे। प्रत्येक भवन की निर्माण लागत करीब दो करोड़ दो लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसी आधार पर पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 88 करोड़ 89 लाख 76 हजार रुपये तय की गई है। इस परियोजना का कार्यान्वयन वित्तीय वर्ष 2025-26 तथा आगामी वर्षों में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
किस जेल में कितने भवन?
विभागीय जानकारी के अनुसार इन 44 आवासीय भवनों का जिलेवार वितरण इस प्रकार होगा। मोतिहारी में सबसे अधिक चार और पूर्णिया में तीन आवासीय भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा मुजफ्फरपुर, आरा, भभुआ, सिवान, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, बेगूसराय, जमुई, लखीसराय, मुंगेर, शेखपुरा, औरंगाबाद और नवादा में दो-दो आवासीय भवन बनाए जाएंगे। वहीं बेतिया में एक आवासीय भवन का निर्माण होगा।
क्यों जरूरी है यह परियोजना?
बिहार कारा हस्तक 2012 के नियमों के तहत मुख्य कक्षपाल और उससे ऊपर के अधिकारियों को जेल परिसर के भीतर ही किरायामुक्त आवास उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। लेकिन अब तक पर्याप्त आवासीय भवन न होने की वजह से यह प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हो पा रहा था।
नियमों के अनुसार कुल कक्षपालों में से 10 प्रतिशत को पारिवारिक आवास और शेष को एकल आवासीय सुविधा देने का प्रावधान है। वर्तमान में राज्य में 5034 कक्षपाल पद स्वीकृत हैं। मौजूदा और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यापक आवास योजना तैयार की गई है।
थाना भवनों के लिए भी हुई स्वीकृति
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि हाल ही में 46 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से पूर्वी चंपारण, अररिया, सारण, बेगूसराय और किशनगंज में थाना भवन और आधारभूत संरचना निर्माण को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कदम बिहार में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बिहार जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम कदम
इस परियोजना के पूरा होने के बाद जेल अधिकारियों को परिसर के भीतर रहने की सुविधा मिलेगी जिससे जेल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था दोनों में सुधार आएगा। अधिकारियों की परिसर में उपस्थिति से आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी और जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखना भी आसान होगा। यह परियोजना बिहार में जेल सुधार के व्यापक अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।