भिखारी ठाकुर सिर्फ नाम नहीं, एक विचार हैं— राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भिखारी ठाकुर की जयंती पर उन्हें 'भोजपुरी का शेक्सपियर' और एक 'अमर विचार' बताया। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपने नाटकों के जरिए नशाखोरी और बेमेल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार कर समाज को नई दिशा दी और भोजपुरी संस्कृति को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई।

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BNT Desk: बिहार के सारण जिले के कुतुबपुर दियारा में गुरुवार को एक अलग ही रौनक देखने को मिली। अवसर था भोजपुरी के युगपुरुष और महान लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की जयंती का। इस खास मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भिखारी ठाकुर को याद करते हुए एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर महज एक व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि वे एक ऐसे ‘विचार’ हैं जो समाज को हमेशा सही रास्ता दिखाते रहेंगे। राज्यपाल ने उन्हें ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कला से बिहार का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है।

साहित्य और कला से बदली समाज की सूरत

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने उपनिषदों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब कला आम लोगों की जिंदगी से जुड़ती है, तो वह सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह जाती, बल्कि समाज का मार्गदर्शन करने लगती है। भिखारी ठाकुर का साहित्य और उनके नाटक इसी बात का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह एक पेड़ पर अमृत के फल लगते हैं, उसी तरह भिखारी ठाकुर के नाटक और गीत समाज के लिए अमृत के समान हैं, जो हमारी संस्कृति को और भी सुंदर बनाते हैं।

कुरीतियों पर प्रहार: नाटक बना सामाजिक हथियार

राज्यपाल ने भिखारी ठाकुर के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1887 में एक साधारण परिवार में जन्मा यह बालक अपनी प्रतिभा के दम पर असाधारण बना। उन्होंने याद दिलाया कि जिस दौर में देश गुलामी से लड़ रहा था और महात्मा गांधी अहिंसा का पाठ पढ़ा रहे थे, उस समय भिखारी ठाकुर अपने नाटकों के जरिए सामाजिक बुराइयों से जंग लड़ रहे थे। उन्होंने नशाखोरी, बेमेल विवाह, और बेटियों को बेचने जैसी गंभीर कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उनके लिखे गीतों ने उस दौर में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का काम किया।

भोजपुरी संस्कृति के ‘अनगढ़ हीरा’ को सलाम

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने राहुल सांकृत्यायन और जगदीश चंद्र माथुर जैसे बड़े साहित्यकारों की बातों को दोहराया, जिन्होंने भिखारी ठाकुर को ‘भोजपुरी का अनगढ़ हीरा’ कहा था। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय और लोकभाषा के लिए भिखारी ठाकुर का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। आज की युवा पीढ़ी को भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। इस समारोह ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भिखारी ठाकुर की विरासत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी वह दशकों पहले थी।

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