भागलपुर में फिर बड़ा पुल हादसा टला? विक्रमशिला सेतु निर्माणाधीन के समानांतर 4-लेन पुल के 3 पिलर झुके, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

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BNT Desk: बिहार में पुलों के ढहने और पिलरों के धंसने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला भागलपुर जिले का है, जहाँ गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु के समानांतर (Parallel) बन रहे नए 4-लेन पुल के तीन पिलर झुक गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर बिहार में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तकनीकी मजबूती और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

निर्माणाधीन पुल के पिलर नंबर 1, 2 और 3 में आई खराबी

जानकारी के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के लोड को कम करने के लिए इसके बगल में ही एक नए 4-लेन पुल का निर्माण युद्धस्तर पर चल रहा है। अभी इस पुल के पिलरों का काम ही चल रहा था कि शुरुआती तीन पिलरों में झुकाव देखा गया है। राहत की बात यह है कि इन पिलरों के ऊपर अभी कोई भारी स्ट्रक्चर या स्लैब (गर्डर) नहीं रखा गया था, वरना एक बड़ी त्रासदी हो सकती थी। पिलरों के झुकने की खबर फैलते ही निर्माण स्थल पर हड़कंप मच गया और आनन-फानन में विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया।

तकनीकी गड़बड़ी या मिट्टी की जांच में चूक?

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि आखिर पिलर झुके कैसे? इसके पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं:

  • सॉइल टेस्टिंग (Soil Testing): क्या पुल बनाने से पहले गंगा के तल की मिट्टी की सही ढंग से जांच की गई थी?

  • पिलर की गहराई: क्या पिलर (Piling) को उतनी गहराई तक ले जाया गया जितना कि डिजाइन में तय था?

  • घटिया सामग्री: पिलर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कंक्रीट और लोहे की गुणवत्ता पर भी संदेह जताया जा रहा है।

  • गंगा का बहाव: गंगा की लहरों का दबाव और मिट्टी के कटाव को डिजाइन में सही तरीके से शामिल न करना भी एक कारण हो सकता है।

अगुवानी और भागलपुर के पुराने जख्म फिर हरे

भागलपुर के लोग अभी सुल्तानगंज-अगुवानी पुल हादसे को भूले नहीं हैं, जो दो बार गंगा में समा चुका है। विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे इस पुल से करोड़ों लोगों की उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। यदि निर्माण के शुरुआती चरण में ही पिलर झुकने लगे हैं, तो भविष्य में इसके ऊपर से गुजरने वाले हजारों भारी वाहनों का भार यह पुल कैसे सहेगा? यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

निर्माण एजेंसी और अधिकारियों की चुप्पी

पिलरों के झुकने की खबर के बाद निर्माण कार्य में जुटी एजेंसी के अधिकारियों ने फिलहाल इस पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि, तकनीकी रूप से इसे ‘सेटलमेंट’ (Settlement) का नाम दिया जा रहा है, लेकिन तीन-तीन पिलरों का एक साथ झुकना किसी बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। विभाग के वरिष्ठ अभियंता इस मामले की जांच के लिए मौके पर पहुंचने वाले हैं।

करोड़ों की लागत और जनता की सुरक्षा दांव पर

विक्रमशिला सेतु पर ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है, जिसे कम करने के लिए इस नए पुल का निर्माण करोड़ों रुपये की लागत से किया जा रहा है। यदि निर्माण के दौरान ही ऐसी तकनीकी खामियां सामने आती हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने की बर्बादी और आम जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे प्रोजेक्ट का ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ (Third Party Audit) कराया जाए ताकि दोषियों की पहचान हो सके।

क्या सबक लेगा पथ निर्माण विभाग?

बिहार में लगातार हो रहे पुल हादसों के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुल रही है। भागलपुर में पिलरों का झुकना एक चेतावनी है। सरकार को चाहिए कि निर्माण कार्य को तुरंत रोककर इसकी उच्च स्तरीय जांच कराए। इससे पहले कि यह पुल भी किसी बड़े हादसे का कारण बने, इसकी नींव को दुरुस्त करना अनिवार्य है।

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