BNT Desk: बिहार की राजनीति में जब भी बाहुबल, वफादारी और विवाद की बात होती है — एक नाम सबसे पहले आता है। अनंत सिंह मोकामा के विधायक, जदयू के नेता, और उनके समर्थकों के लिए — ‘छोटे सरकार।’
आज करीब चार महीने बाद वो बेऊर जेल की दीवारों से बाहर निकले। पटना हाईकोर्ट ने उन्हें RJD नेता दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत दे दी। और जैसे ही यह खबर फैली — पटना से मोकामा तक जश्न का माहौल बन गया। माल रोड आवास पर पंडाल सजने लगे। बाढ़ में रसगुल्ले बनने लगे। समर्थक सैकड़ों किलोमीटर दूर से पटना की ओर निकल पड़े।
यह सिर्फ एक नेता की रिहाई नहीं थी। यह बिहार की उस राजनीतिक संस्कृति का जीवंत दृश्य था — जहाँ जेल जाना कमज़ोरी नहीं, और जेल से निकलना किसी विजय से कम नहीं माना जाता।
दोपहर 2 बजे खुला बेऊर जेल का दरवाज़ा
सोमवार दोपहर ठीक 2 बजे बेऊर जेल का दरवाज़ा खुला और अनंत सिंह बाहर आए। जेल के बाहर समर्थकों की भीड़ पहले से मौजूद थी। नारे लग रहे थे। फूलमाला, ढोल-नगाड़े — सब तैयार था।
जेल से निकलने के बाद अनंत सिंह सीधे पटना के माल रोड स्थित आवास की ओर रवाना हुए। रास्ते में जगह-जगह समर्थकों ने उनका स्वागत किया। काफिले में गाड़ियों की लंबी कतार थी। जो लोग वहाँ मौजूद थे, उनका कहना था — “जब अनंत भैया का काफिला निकलता है तो गाड़ियाँ गिनी नहीं जातीं।”
माल रोड आवास पर किसी उत्सव से कम नहीं था नज़ारा
पटना के माल रोड स्थित अनंत सिंह के आवास पर भव्य स्वागत की तैयारी कई दिनों से चल रही थी। आवास को दुल्हन की तरह सजाया गया था। विशाल पंडाल बनाया गया जिसमें डेढ़ हज़ार से अधिक कुर्सियाँ लगाई गई थीं।
मार्च की गर्मी को देखते हुए बड़े-बड़े पंखे और कूलर मंगाए गए थे ताकि दूर-दूर से आए समर्थकों को कोई तकलीफ न हो। आयोजकों के अनुमान के मुताबिक इस अवसर पर 10 से 15 हज़ार से अधिक समर्थक जुटे।
3 लाख रसगुल्ले, पुलाव, पनीर — शाही दावत की तैयारी
समर्थकों के लिए जो भोज तैयार किया गया, वो किसी बड़े शादी समारोह से कम नहीं था।
सबसे चर्चित रही तीन लाख रसगुल्लों की तैयारी। ये रसगुल्ले बाढ़ में बनाए गए और वहाँ से पटना लाए गए। बाढ़ अपनी मिठाइयों के लिए जाना जाता है — और इतनी बड़ी तादाद में रसगुल्ले बनवाना खुद अनंत सिंह की लोकप्रियता का प्रतीक बन गया।
रसगुल्लों के अलावा पटना आवास पर समोसा, पूड़ी, सब्जी, पुलाव और पनीर की सब्जी समेत कई व्यंजन बनाए गए। हज़ारों की संख्या में आए समर्थकों ने साथ मिलकर खाना खाया और जश्न मनाया।
मंगलवार को मोकामा कूच — 50KM लंबा रोडशो
पटना में एक रात रुकने के बाद अनंत सिंह मंगलवार 24 मार्च को मोकामा के लिए रवाना होंगे। अपने विधानसभा क्षेत्र में उनका 50 किलोमीटर लंबा रोडशो होगा।
इस रोडशो में वे सड़क मार्ग से बड़हिया महारानी स्थान मंदिर तक जाएंगे। रास्ते में कई जगह समर्थक उनका स्वागत करेंगे। मोकामा में भी भव्य तैयारियाँ की जा रही हैं। माना जा रहा है कि यह रोडशो बिहार के राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक चर्चा में बना रहेगा।
दुलारचंद हत्याकांड — पूरी कहानी शुरू से
28 अक्टूबर — जब दुलारचंद ने कहा वो बात
28 अक्टूबर 2025 को यानी हत्या से दो दिन पहले RJD नेता दुलारचंद यादव ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी के बारे में आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कही थीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि नीलम देवी भूमिहार नहीं हैं और उनके बारे में कई अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं। इसने दोनों पक्षों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया।
30 अक्टूबर — मोकामा टाल में हत्या
30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार का आखिरी दौर चल रहा था। मोकामा टाल इलाके में दुलारचंद यादव की हत्या हो गई। आरोप अनंत सिंह और उनके करीबी समर्थकों पर लगा।
पुलिस के अनुसार दुलारचंद पर लाठियों से हमला किया गया, गाड़ी से कुचला गया और गोली भी मारी गई।
1 नवंबर — SSP खुद पहुंचे गिरफ्तार करने
हत्या की अगली रात — 1 नवंबर 2025 को — पटना SSP कार्तिकेय शर्मा खुद एक बड़ी पुलिस टीम के साथ मोकामा स्थित अनंत सिंह के आवास पहुंचे। देर रात हुई इस कार्रवाई में अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया।
2 नवंबर — बेऊर जेल रवाना
2 नवंबर 2025 को कोर्ट में पेशी के बाद अनंत सिंह को बेऊर जेल भेज दिया गया। तब से वो जेल में बंद थे। करीब चार महीने की यह जेल यात्रा आज समाप्त हुई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या निकला?
दुलारचंद यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए। रिपोर्ट के अनुसार —
शरीर पर कई जगह गहरे घाव और खून जमने के निशान थे। फेफड़े फटे हुए मिले जिससे बड़े पैमाने पर आंतरिक रक्तस्राव हुई। छाती की कई पसलियाँ टूटी हुई पाई गईं। दाहिनी ओर रीढ़ की हड्डी के पास भी चोट के निशान मिले। सिर, घुटने, टखने और पीठ पर गहरे ज़ख्म थे। इसके अलावा दाहिने पैर पर गनशॉट इंजरी यानी गोली लगने का निशान भी पाया गया।
रिपोर्ट में मौत का प्रमुख कारण लाठी से मारना और गाड़ी से कुचलना बताया गया — न कि गोली।
इस मामले में चार FIR दर्ज
पटना SSP कार्तिकेय शर्मा के मुताबिक इस मामले में अब तक चार FIR दर्ज की गई हैं।
पहली FIR — दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने भदौर थाने में दर्ज कराई। दूसरी FIR — अनंत सिंह के समर्थक जितेंद्र कुमार ने दर्ज कराई। तीसरी FIR — पुलिस ने खुद अपने बयान पर दर्ज की। चौथी FIR का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट में रखी गई चार दमदार दलीलें
अनंत सिंह के वकील ने पटना हाईकोर्ट में जमानत के लिए चार प्रमुख दलीलें रखीं, जो काफी प्रभावशाली साबित हुईं।
पहली दलील — अनंत सिंह पर आरोप था कि उन्होंने खुद दुलारचंद के बाएं पैर की एड़ी में गोली मारी। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण लाठी और गाड़ी से कुचलना बताया गया है — गोली नहीं। यानी आरोप और मेडिकल रिपोर्ट में सीधा विरोधाभास है।
दूसरी दलील — घटनास्थल पर उपस्थित पुलिसकर्मियों के बयान लिए गए थे। किसी भी पुलिसकर्मी ने अपने बयान में यह नहीं कहा कि अनंत सिंह ने गोली चलाई। यह बेहद अहम दलील थी क्योंकि पुलिस खुद गवाह है।
तीसरी दलील — दुलारचंद के जिस पोते के बयान पर FIR दर्ज हुई, उसने अपने पिता को जो पहला फोन किया उसमें उसने कहा — “दादा जी की मौत हो गई” — न कि “हत्या हुई है।” यह बारीक लेकिन कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण अंतर था।
चौथी दलील — अनंत सिंह एक राजनेता हैं और इस वजह से राजनीतिक विरोधी उन पर बेवजह के आरोप लगाते रहे हैं। उनके खिलाफ यह मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।
कोर्ट ने इन सभी दलीलों पर विचार करते हुए जमानत मंजूर की।
चुनाव न लड़ने का ऐलान — नीतीश के बिना मैदान में नहीं उतरेंगे
एक अहम राजनीतिक पहलू यह भी है कि अनंत सिंह पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वो आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।
राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के बाद जब वो बाहर निकले तो मीडिया ने उनसे पूछा — अगला CM कौन होगा? उन्होंने कहा — “नीतीश जी तय करेंगे।” जब पूछा गया कि नीतीश के बिना चुनाव लड़ेंगे? तो उनका जवाब था — “नीतीश नहीं रहेंगे तो मैं भी चुनाव नहीं लड़ूंगा।”
निशांत और तेजस्वी में से किसे अच्छा मानते हैं — इस सवाल को वो टाल गए।
बिहार की राजनीति में अनंत सिंह का मतलब
मोकामा सीट बिहार की उन सीटों में से है जहाँ व्यक्ति बड़ा होता है, पार्टी नहीं। अनंत सिंह इस सीट पर कई बार जीत चुके हैं। जेल जाने के बाद भी उनके समर्थकों का मनोबल नहीं टूटा। उनकी पत्नी नीलम देवी ने भी विधानसभा चुनाव लड़ा।
आज उनकी रिहाई पर जो जश्न देखा गया — वो बिहार की उस राजनीतिक ज़मीन की कहानी है जहाँ जनाधार सिर्फ वोट से नहीं, भावना से बनता है।
अब देखना यह है कि जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह बिहार की राजनीति में किस नई भूमिका में दिखते हैं — और दुलारचंद हत्याकांड में अदालती लड़ाई किस दिशा में जाती है।