बिहार के नालंदा जिले की रहने वाली आरती गुप्ता ने एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर पूरे प्रदेश को गर्व है। आरती बिहार की पहली महिला मौसम विज्ञानी बन गई हैं, जिनका चयन अंटार्कटिका के कठिन अभियान के लिए हुआ है। वे भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की 45वीं भारतीय वैज्ञानिक अंटार्कटिका शीतकालीन टीम का हिस्सा हैं। कुल 52 सदस्यों की इस विशेष टीम में वैज्ञानिक, डॉक्टर और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं, जो दुनिया के सबसे ठंडे महाद्वीप पर शोध करेंगे।
बचपन का सपना हुआ सच
आरती बताती हैं कि जब उन्होंने मौसम विभाग में अपनी नौकरी शुरू की थी, तब पहले ही दिन एक मैगजीन में अंटार्कटिका अभियानों के बारे में पढ़ा था। उसी पल उन्होंने तय कर लिया था कि एक दिन वे भी इस ‘सफ़ेद महाद्वीप’ पर कदम रखेंगी। किताबों में जिस बर्फीली दुनिया की कहानियाँ पढ़ी थीं, आज आरती उसे अपनी आँखों से देखने जा रही हैं। उनके लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है।
चयन प्रक्रिया और कड़ी ट्रेनिंग
अंटार्कटिका जाना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए आरती को कई कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा। सबसे पहले दिल्ली के एम्स (AIIMS) में एक हफ्ते तक उनकी शारीरिक और मानसिक जांच हुई। इसके बाद, औली के बर्फीले पहाड़ों में आईटीबीपी (ITBP) द्वारा एक महीने की सख्त ट्रेनिंग दी गई, जहाँ उन्हें शून्य से नीचे के तापमान में जीवित रहना सिखाया गया। एक साल तक परिवार और समाज से दूर रहकर काम करना मानसिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होता है, जिसके लिए आरती पूरी तरह तैयार हैं।
मुश्किलें और भविष्य का लक्ष्य
अंटार्कटिका पृथ्वी की सबसे सूखी और ठंडी जगह है, जहाँ तापमान -89 डिग्री तक गिर जाता है। आरती का कहना है कि वहां सीमित संसाधनों और भारी अंधेरे के बीच काम करना मुश्किल होगा, लेकिन वे अपने देश और बिहार का नाम रौशन करने के लिए उत्साहित हैं। उनका लक्ष्य न केवल वैज्ञानिक रिसर्च को आगे बढ़ाना है, बल्कि देश की हर बेटी को यह संदेश देना है कि अगर ठान लिया जाए, तो कोई भी सपना नामुमकिन नहीं है।