BNT Desk: बिहार के लौरिया शुगर मिल में हुए चीनी घोटाले को लेकर विशेष अदालत ने छह व्यक्तियों को दोषी ठहराया। यह मामला सितंबर 1989 का है और इसमें सरकारी कोष का दुरुपयोग और चीनी की अवैध बिक्री शामिल थी। अदालत ने इस लंबे समय तक लंबित मामले में 36 साल बाद फैसला सुनाया, जिसे चारा घोटाले जैसी तुलना भी दी जा रही है।
दोषियों की पहचान
दोषियों में शामिल हैं: पूर्व प्रशासन प्रमुख नंद कुमार सिंह, पूर्व उपप्रबंधक उमेश प्रसाद सिंह, क्लर्क सुशील कुमार श्रीवास्तव, चीनी बिक्री प्रभारी धीरेंद्र झा, गन्ना क्लर्क लालबाबू प्रसाद, और लेखा अधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव। ये अधिकारी मिल के प्रबंधन में शामिल थे और उन्होंने फर्जी फर्म के नाम पर चीनी की बिक्री तथा सरकारी वाहन और निजी परिवहन पर आपूर्ति की रिपोर्ट में गड़बड़ी की।
अदालत की सुनवाई और सबूत
मामला विशेष सतर्कता अदालत में सुना गया। अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए, जिनमें तत्कालीन DIG भी शामिल थे। प्रारंभ में शिकायतों के बाद जांच बंद कर दी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री के आदेश पर इसे पुनः खोला गया। सतर्कता ब्यूरो ने FIR दर्ज कर कई अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया, जिससे यह लंबित मामला अदालत में आया।
सजा की घोषणा 18 दिसंबर को
दोषी करार दिए जाने के बाद सजा की घोषणा 18 दिसंबर 2025 को होगी। अदालत आरोपों की गंभीरता और सबूतों के आधार पर दंड तय करेगी। यह फैसला बिहार के सबसे लंबे समय तक लंबित घोटाले मामलों में से एक को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।