BNT Desk: रिश्तों के कत्ल की खबरें तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर प्रशासनिक अधिकारी भी दंग रह गए। जिले के कुशेश्वरस्थान प्रखंड में एक बेटे ने सरकारी रिकॉर्ड में अपने जीवित पिता को ‘मृत’ दिखाकर उनका मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) बनवाने की साजिश रची।
मामला तब खुला जब जिलाधिकारी (DM) के आदेश पर अधिकारी जांच करने गांव पहुँचे और वहां वह शख्स अपनी पत्नी के साथ बिल्कुल सही-सलामत और जीवित मिला।
DM के जनता दरबार में लगाई थी गुहार
यह पूरा मामला कुशेश्वरस्थान प्रखंड के रामबाड़ी गांव का है। गांव के रहने वाले विनोद चौपाल के बेटे रविंद्र चौपाल ने अपनी चालाकी से सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की। रविंद्र ने दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार के जनता दरबार में आवेदन देकर गुहार लगाई कि उसके पिता विनोद चौपाल की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनका मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत नहीं किया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि एक बार आवेदन देने के बाद जब काम नहीं हुआ, तो आरोपी बेटे ने 23 मार्च को दोबारा जनता दरबार में जाकर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की।
जांच के लिए घर पहुँचे BDO तो उड़ गए होश
लगातार मिल रहे आवेदनों के बाद जिलाधिकारी कार्यालय ने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से इस मामले पर रिपोर्ट मांगी। डीएम के निर्देश पर कुशेश्वरस्थान के बीडीओ ललन कुमार चौधरी और पंचायत सचिव जवाहर कुमार मामले के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए रामबाड़ी गांव पहुँचे।
जैसे ही अधिकारी आवेदक के घर पहुँचे, वहां का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। जिस व्यक्ति को कागजों में मरा हुआ बताकर बेटा प्रमाण पत्र मांग रहा था, वह विनोद चौपाल अपनी पत्नी के साथ घर में जीवित और स्वस्थ पाए गए। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर ही आवेदक के दावे को फर्जी करार दिया।
आखिर बेटे ने क्यों रची यह साजिश?
एक जीवित पिता को सरकारी फाइलों में ‘मुर्दा’ घोषित करने के पीछे बेटे की मंशा क्या थी, अब पुलिस और प्रशासन इसकी गहराई से जांच कर रहे हैं।
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संपत्ति विवाद: अक्सर ऐसे मामलों में जमीन-जायदाद हड़पने या पिता के नाम की संपत्ति को अपने नाम कराने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र का सहारा लिया जाता है।
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सरकारी लाभ: मृतक के नाम पर मिलने वाली पेंशन, अनुग्रह राशि या अन्य किसी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए भी ऐसी धोखाधड़ी की जाती है।
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नौकरी का लालच: कई बार अनुकंपा पर नौकरी पाने के लिए भी जीवित माता-पिता को मृत घोषित करने की साजिश रची जाती है।
प्रशासन का सख्त रुख: 15 दिनों का अल्टीमेटम
इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद बीडीओ ललन कुमार चौधरी ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने पूरी जांच रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजने की तैयारी कर ली है। साथ ही, प्रखंड के अन्य लंबित मामलों में भी गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए पंचायत सचिव और डेटा ऑपरेटर को सख्त निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने आदेश दिया है कि जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े जितने भी मामले लंबित हैं, उनका अगले 15 दिनों के भीतर भौतिक सत्यापन किया जाए। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि बिना मौके पर जाकर जांच किए कोई भी प्रमाण पत्र जारी न किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
बीडीओ का आधिकारिक बयान
मामले की पुष्टि करते हुए बीडीओ ललन कुमार चौधरी ने कहा, “सत्यापन के दौरान हम रामबाड़ी गांव पहुंचे थे। वहां विनोद चौपाल अपनी पत्नी के साथ जीवित मिले। यह गंभीर मामला है। हम पता लगा रहे हैं कि आवेदक रविंद्र चौपाल ने किस मंशा और स्वार्थ के कारण अपने जीवित पिता के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा था। रिपोर्ट डीएम कार्यालय को सौंपी जाएगी।”
रिश्तों पर सवालिया निशान
यह घटना समाज के गिरते नैतिक मूल्यों और सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिशों का एक जीता-जागता उदाहरण है। जिस पिता ने बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, उसी बेटे ने चंद स्वार्थों के लिए उन्हें कागजों पर ‘मृत’ बना दिया। फिलहाल प्रशासन इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।