झारखंड में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को बिहार में ऑनलाइन परीक्षा का टेंडर, परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

झारखंड में ब्लैकलिस्ट हो चुकी एक कंपनी को बिहार में ऑनलाइन परीक्षा कराने का टेंडर दिया गया है। इससे टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। विपक्ष और छात्र संगठन इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बता रहे हैं और जांच की मांग कर रहे हैं।

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BNT Desk: बिहार में ऑनलाइन परीक्षा कराने के लिए जिस कंपनी को टेंडर दिया गया है, उसे लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि यह वही कंपनी है, जिसे पहले झारखंड में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जिस कंपनी पर पहले ही गंभीर आरोप लग चुके हैं, उसे बिहार में इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे दे दी गई।

झारखंड में क्यों हुई थी ब्लैकलिस्ट

जानकारी के अनुसार, झारखंड में इस कंपनी पर परीक्षा प्रक्रिया में लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। शिकायतें मिलने के बाद वहां की सरकार ने जांच कराई और बाद में कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसके बाद उसे किसी भी सरकारी परीक्षा या ऑनलाइन सिस्टम से जुड़े काम से दूर रखा गया था।

बिहार में कैसे मिला टेंडर

अब वही कंपनी बिहार में ऑनलाइन परीक्षा कराने का टेंडर हासिल कर चुकी है। यह टेंडर किस आधार पर दिया गया, इसे लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों को नजरअंदाज किया गया और छात्रों के भविष्य से समझौता किया गया है।

छात्रों के भविष्य पर खतरा

ऑनलाइन परीक्षाएं लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। अगर परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी होती है या तकनीकी खामियां सामने आती हैं, तो इसका सीधा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है। ऐसे में पहले से विवादों में रही कंपनी को जिम्मेदारी देना छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।

सरकार से जवाब की मांग

मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने सरकार से इस पूरे टेंडर की जांच कराने और जवाब देने की मांग की है। वहीं छात्र संगठनों ने भी आशंका जताई है कि अगर समय रहते फैसला नहीं बदला गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

जांच की उठी मांग

फिलहाल इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है। लोगों का कहना है कि परीक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही छात्रों के भविष्य को अंधेरे में डाल सकती है। इसलिए सरकार को इस पर जल्द और सख्त फैसला लेना चाहिए।

 

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