BNT Desk: बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की उस याचिका को मंजूरी दे दी है, जो सीधे तौर पर आपके घर के बजट को प्रभावित करने वाली है। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश में ‘टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ’ लागू होने जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब पूरे 24 घंटे बिजली की दरें एक समान नहीं रहेंगी। स्मार्ट मीटर अब सिर्फ आपकी खपत नहीं मापेगा, बल्कि यह भी देखेगा कि आप किस समय बिजली जला रहे हैं।
क्या है ‘टाइम ऑफ डे’ टैरिफ? समझें समय का खेल
इस नई व्यवस्था के तहत दिन को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से के लिए बिजली की दरें अलग होंगी:
-
सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक (राहत का समय): यह समय उपभोक्ताओं के लिए सबसे सस्ता होगा। इस दौरान आपको सामान्य दर का केवल 80 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा। यानी अगर आप भारी उपकरण (जैसे वॉशिंग मशीन या मोटर) इस वक्त चलाते हैं, तो आपकी बचत होगी।
-
शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक (महंगा समय/पीक ऑवर): यह वो वक्त है जब सूरज ढलते ही हर घर में लाइट, पंखे और एसी एक साथ चलते हैं। इस दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को सामान्य से 110 प्रतिशत (10% अतिरिक्त) और गैर-घरेलू (कमर्शियल) उपभोक्ताओं को 130 प्रतिशत (30% अतिरिक्त) तक शुल्क देना होगा।
-
रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक (सामान्य समय): इस दौरान बिजली की दरें 100 प्रतिशत यानी सामान्य रहेंगी।
किन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा असर?
बिहार में वर्तमान में लगभग 2 करोड़ 21 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। शुरुआती चरण में यह नियम उन सभी उपभोक्ताओं पर लागू होगा जिनके यहाँ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं। विशेष रूप से 10 किलोवाट से अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य रूप से प्रभावी होगा। सरकार का तर्क है कि शाम के समय बिजली की मांग 4000 मेगावाट से बढ़कर अचानक 7000 मेगावाट पार कर जाती है, जिससे ग्रिड पर भारी दबाव पड़ता है। इस दबाव को कम करने के लिए ही यह ‘डिमांड मैनेजमेंट’ फॉर्मूला लाया गया है।
स्मार्ट मीटर: अब बनेगा आपका बजट कंट्रोलर
अब तक स्मार्ट मीटर सिर्फ रिचार्ज खत्म होने पर बिजली काटने के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह आपका व्यवहार भी बदलेगा। यदि आपने शाम 5 बजे के बाद बेपरवाही से बिजली का इस्तेमाल किया, तो आपका प्रीपेड बैलेंस बिजली की रफ्तार से खत्म होगा। यह व्यवस्था पहले सिर्फ बड़े उद्योगों के लिए थी, लेकिन अब इसे आम आदमी की चौखट तक पहुँचा दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपभोक्ताओं को अपनी आदतों में सुधार करने और सौर ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करने का एक तरीका है।