BNT Desk: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर दिल्ली की राजनीति में अपनी नई पारी शुरू कर दी है। उनके इस कदम के साथ ही बिहार की कुर्सी को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला करने के लिए आज दिल्ली में भाजपा कोर ग्रुप की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में बिहार भाजपा के तमाम दिग्गज नेता शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद बिहार की राजनीति का नया चेहरा साफ हो जाएगा।
दिग्गज नेताओं का जमावड़ा: किसे मिलेगी कमान?
बैठक के लिए बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा, गुरुवार को ही दिल्ली पहुँच चुके हैं। इस बैठक की खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय शूटर और विधायक श्रेयसी सिंह को भी विशेष रूप से दिल्ली बुलाया गया है, जिससे सियासी हलकों में उनके नाम को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बैठक में शामिल प्रमुख चेहरे:
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विनोद तावड़े: बिहार भाजपा के प्रभारी।
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संजय सरावगी: प्रदेश अध्यक्ष।
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नित्यानंद राय: केंद्रीय मंत्री।
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संजय जायसवाल: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।
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दिलीप जायसवाल और मंगल पांडेय: बिहार सरकार के मंत्री।
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संगठन के स्तंभ: भीखू भाई दलसानिया और नागेंद्र जी।
सीएम की रेस में 5 नाम: जातीय समीकरण और अनुभव पर नजर
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के पास मुख्यमंत्री पद के लिए 5 नामों की एक शॉर्टलिस्ट है। पार्टी की कोशिश है कि चेहरा ऐसा हो जिस पर एनडीए के सभी घटक दल सहमत हों और जो 2025 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को मजबूती दे सके।
इस बैठक में औपचारिक रूप से प्रदेश कमेटी से नाम मांगे जाएंगे, जिसे बाद में केंद्रीय आलाकमान (संसदीय बोर्ड) के पास अंतिम मुहर के लिए भेजा जाएगा। बैठक में न केवल नाम पर, बल्कि शपथ ग्रहण के पूरे शेड्यूल पर भी चर्चा हो रही है।
15 अप्रैल को हो सकता है नई सरकार का शपथ ग्रहण
बिहार में नई सरकार के गठन के लिए 15 अप्रैल की तारीख सबसे अहम मानी जा रही है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:
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खरमास का अंत: 14 अप्रैल को खरमास समाप्त हो रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।
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संसद का विशेष सत्र: 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र शुरू होना है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जैसे महत्वपूर्ण बिल पेश होने हैं। पार्टी चाहती है कि उससे पहले बिहार का संकट सुलझ जाए।
सियासी कैलेंडर: अगले 5 दिनों का पूरा प्लान
बिहार में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ने वाली है:
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10-11 अप्रैल: नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ के बाद दिल्ली में रुककर 11 अप्रैल को पटना लौटेंगे।
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12-13 अप्रैल: एनडीए के सभी घटक दल (बीजेपी, जेडीयू, हम, लोजपा) अपने-अपने विधायक दल की अलग-अलग बैठकें करेंगे।
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14 अप्रैल: एनडीए विधायक दल की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें नए नेता (मुख्यमंत्री) के नाम का औपचारिक ऐलान होगा। इसी दिन नीतीश कुमार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
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15 अप्रैल: बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हो सकता है।
बदलाव की दहलीज पर बिहार
पिछले 21 सालों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार का दिल्ली प्रस्थान एक बड़े युग का अंत है। भाजपा अब बिहार में अपने दम पर अपनी छवि गढ़ना चाहती है। दिल्ली की इस बैठक से जो नाम निकलकर आएगा, वह न केवल बिहार का भविष्य तय करेगा, बल्कि एनडीए के भीतर शक्ति संतुलन को भी नई दिशा देगा।
पूरे बिहार की नजरें अब दिल्ली के भाजपा मुख्यालय और पटना के राजभवन पर टिकी हैं। अगले 48 घंटे बिहार की सियासत के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।