BNT Desk: बिहार में इस बार मार्च का महीना सरकार और आम लोगों दोनों के लिए मुश्किल भरा साबित हो रहा है। खासकर राजस्व विभाग से जुड़े कामकाज पर हड़ताल का असर साफ दिख रहा है। मार्च सरकार के लिए बेहद अहम होता है, क्योंकि इसी महीने वित्तीय वर्ष खत्म होता है और लगान व अन्य राजस्व की वसूली का लक्ष्य पूरा करना होता है। जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और रजिस्ट्रेशन जैसे काम ठप पड़ने से सरकार की आमदनी पर भी असर पड़ सकता है।
ब्लॉक ऑफिस के काम ठप
आम लोगों के लिए भी यह स्थिति परेशानी भरी है। स्कूल और कॉलेज में एडमिशन, नौकरी के आवेदन या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र जरूरी होते हैं। ये सभी काम अंचल और ब्लॉक कार्यालयों के जरिए होते हैं। लेकिन इस समय अधिकतर कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे प्रमाण पत्र बनवाने में लोगों को दिक्कत हो रही है। कई लोग रोज अंचल कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन काम नहीं हो पा रहा।
11 फरवरी से हड़ताल पर राजस्व कर्मचारी
राजस्व कर्मचारी 11 फरवरी से ही हड़ताल पर हैं। उनकी 17 सूत्री मांगें हैं, जिन पर सरकार से बातचीत नहीं हो पाई है। मुख्य मांगों में ग्रेड पे 1900 से बढ़ाकर 2800 करना, नई नियुक्ति वालों को गृह जिले में ट्रांसफर, वरीयता के आधार पर प्रोमोशन और पुरानी पेंशन योजना की बहाली शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
सीओ और आरओ की अलग नाराजगी
सिर्फ राजस्व कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अंचल अधिकारी (सीओ) और राजस्व पदाधिकारी (आरओ) भी नाराज हैं। उनका कहना है कि अनुमंडल स्तर पर डीसीएलआर के पद पर उनकी कैडर से ही प्रोमोशन के आधार पर नियुक्ति होनी चाहिए। राज्य सरकार ने इस पद के लिए अलग संवर्ग बनाने का फैसला किया था, जिसे लेकर विवाद बढ़ा। मामला कोर्ट तक पहुंचा और हाईकोर्ट ने भी कहा कि इस पद को राजस्व सेवा के अधिकारियों से ही भरा जाए। बावजूद इसके, अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
आगे क्या होगा?
सीओ और आरओ ने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की है और होली के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो अंचल स्तर पर कामकाज पूरी तरह ठप हो सकता है। इसका असर न सिर्फ आम जनता पर पड़ेगा, बल्कि सरकार की सालाना राजस्व वसूली पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।