नितिन नवीन बने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष, लेकिन क्या खत्म होंगी 3 मुश्किलें?

बीजेपी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। नितिन नवीन ने मंगलवार को पदभार संभाला। पीएम मोदी ने उन्हें कार्यकर्ता का “बॉस” बताया। बिहार से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन के सामने सीएम चेहरा, गुटबाजी और संगठन विस्तार की बड़ी चुनौतियां हैं।

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BNT Desk: भारतीय जनता पार्टी को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। मंगलवार को नितिन नवीन ने इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी संभाली। पदभार ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच से कहा कि एक कार्यकर्ता के रूप में नितिन नवीन उनके “बॉस” हैं और वे स्वयं एक कार्यकर्ता हैं। पीएम मोदी का यह बयान नितिन नवीन की भूमिका और जिम्मेदारी को और बड़ा बनाता है।

पीएम मोदी का संदेश और बढ़ी जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि नितिन नवीन की जिम्मेदारी केवल बीजेपी तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें एनडीए के सभी सहयोगी दलों को भी साथ लेकर चलना होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी के ये शब्द केवल सलाह नहीं, बल्कि आने वाले समय की चुनौतियों का संकेत हैं।

बिहार से पहला राष्ट्रीय अध्यक्ष

नितिन नवीन बिहार से आने वाले बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में देश के साथ-साथ बिहार पर भी खास नजर है। 2005 से बिहार में एनडीए की सरकार है और अब तक नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिससे पार्टी के पास पहली बार मुख्यमंत्री पद का दावा मजबूत करने का अवसर बना है।

पहली चुनौती: बिहार में सीएम का सवाल

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार नितिन नवीन के सामने पहली बड़ी चुनौती बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाना है। फिलहाल एनडीए नीतीश कुमार को ही नेता मान रहा है, लेकिन उम्र और सेहत को लेकर चर्चाओं के बीच बंगाल चुनाव के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हैं। जदयू में भी अंदरूनी मंथन की खबरें हैं।

दूसरी चुनौती: गुटबाजी पर नियंत्रण

बिहार बीजेपी में अंदरूनी गुटबाजी नितिन नवीन के सामने दूसरी बड़ी चुनौती है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश अध्यक्षों का बार-बार बदलना इसी का संकेत है। पार्टी में अलग-अलग गुट सक्रिय हैं, जिससे संगठन कमजोर पड़ा है।

तीसरी चुनौती: संगठन का विस्तार

2025 के चुनाव में आठ ऐसे जिले रहे, जहां बीजेपी का एक भी विधायक नहीं है। गठबंधन के कारण पार्टी कई सीटों पर चुनाव नहीं लड़ पाती, जिससे संगठन विस्तार प्रभावित होता है। नितिन नवीन के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी बिहार के हर जिले में संगठन को मजबूत करना है, ताकि भविष्य में बीजेपी अपने दम पर चुनाव लड़ सके।

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