BNT Desk: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ दही-चूड़ा खाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यहाँ अक्सर बड़े राजनीतिक उलटफेर की नींव रखी जाती है। इस बार कटिहार में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा दिया है। बीजेपी एमएलसी अशोक अग्रवाल के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में जब कांग्रेस के दिग्गज नेता और सांसद तारिक अनवर मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे, तो हर कोई हैरान रह गया। कट्टर विरोधी पार्टियों के नेताओं का एक साथ बैठना बिहार की राजनीति में किसी बड़े संकेत से कम नहीं माना जा रहा है।
सांसद तारिक अनवर के एक बयान ने बढ़ाई धड़कनें
भोज के दौरान माहौल तो सामाजिक था, लेकिन चर्चा पूरी तरह राजनीतिक रही। जब पत्रकारों ने सांसद तारिक अनवर से बिहार की सियासत में आने वाले बदलावों को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद रहस्यमयी अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “इंतजार कीजिए, कुछ न कुछ तो होगा ही।” उनके इस एक वाक्य ने कयासों का बाजार गर्म कर दिया है कि क्या मकर संक्रांति के बाद बिहार में सत्ता का समीकरण बदलने वाला है या फिर कोई नया गठबंधन आकार ले रहा है।
सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू
हालांकि, मीडिया से बात करते हुए तारिक अनवर ने इस मुलाकात को एक सामाजिक परंपरा बताया। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति भाईचारे और आपसी सौहार्द का प्रतीक है और इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन राजनीति के जानकार इसे इतनी आसानी से नहीं ले रहे हैं। बीजेपी नेता के घर पर कांग्रेस के इतने बड़े चेहरे की मौजूदगी और फिर उनका ‘इंतजार करने’ वाला बयान, साफ़ इशारा कर रहा है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ी खिचड़ी पक रही है।
सामाजिक सद्भाव या सत्ता की नई बिसात?
इस खास भोज में न केवल नेता बल्कि भारी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और अलग-अलग समुदायों के लोग भी शामिल हुए। भले ही इसे सामाजिक सद्भाव का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन चुनाव से पहले ऐसे मेल-मिलाप के गहरे मायने होते हैं। अब देखना यह होगा कि तारिक अनवर की ‘भविष्यवाणी’ कितनी सच साबित होती है और आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति किस करवट बैठती है। क्या वाकई मकर संक्रांति के बाद बिहार में कोई बड़ा ‘खेला’ होने वाला है?