BNT Desk: बिहार में जारी कड़ाके की ठंड का सीधा असर नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) की इमरजेंसी सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। ठंड बढ़ने के साथ ही इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। स्थिति यह है कि जहां इमरजेंसी वार्ड में कुल 30 बेड उपलब्ध हैं, वहीं वहां 50 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इससे डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर काम का दबाव काफी बढ़ गया है।
हृदय, लकवा और सांस के मरीज अधिक
अस्पताल प्रशासन के अनुसार ठंड के कारण सबसे ज्यादा हृदय रोग, लकवा (ब्रेन स्ट्रोक) और सांस से संबंधित बीमारियों के मरीज इमरजेंसी में पहुंच रहे हैं। ठंड में ब्लड प्रेशर बढ़ने, नसों में सिकुड़न और सांस की तकलीफ जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले लेती हैं, जिसके चलते मरीजों को तुरंत इमरजेंसी इलाज की जरूरत पड़ रही है। बुजुर्ग और पहले से बीमार लोगों की संख्या इनमें ज्यादा है।
सीमित संसाधनों के बीच इलाज की कोशिश
मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाने से NMCH की इमरजेंसी में संसाधनों की कमी भी साफ नजर आने लगी है। कई मरीजों को स्ट्रेचर और अतिरिक्त बेड की व्यवस्था कर इलाज दिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाफ पूरी कोशिश कर रहा है कि किसी भी मरीज को इलाज में देरी न हो, लेकिन लगातार बढ़ती भीड़ के कारण व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।
डॉक्टरों की सलाह: ठंड से बचाव जरूरी
NMCH के डॉक्टरों ने लोगों को ठंड के मौसम में खास सावधानी बरतने की सलाह दी है। चिकित्सकों का कहना है कि गर्म कपड़े पहनें, ठंडी हवा से बचें, नियमित दवा लें और लक्षण दिखते ही अस्पताल पहुंचें। खासकर दिल, दमा, बीपी और शुगर के मरीजों को ठंड में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि थोड़ी सी चूक भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।