BNT Desk: दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले बाढ़ रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को हुई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। प्लेटफॉर्म संख्या 02 पर वंदे भारत एक्सप्रेस की चपेट में आने से जिस व्यक्ति की जान गई थी, उसकी पहचान बुधवार देर शाम सोशल मीडिया के माध्यम से हो सकी। मृतक की पहचान नालंदा जिले के शाहाबाद गांव निवासी 55 वर्षीय संजय राउत के रूप में हुई है। गुरुवार सुबह परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर शव की शिनाख्त की, जिसके बाद रेल जीआरपी ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव उन्हें सौंप दिया।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
मंगलवार को बाढ़ स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अफरा-तफरी मच गई जब तेज रफ्तार से आ रही वंदे भारत एक्सप्रेस की चपेट में एक व्यक्ति आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, वह व्यक्ति प्लेटफॉर्म के किनारे खड़ा होकर खैनी थूकने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान वह ट्रेन की दिशा और गति का सही अंदाजा नहीं लगा सका और सीधे इंजन की चपेट में आ गया। मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई थी।
मूक-बधिर होने के कारण नहीं सुन सके मौत की ‘हॉर्न’
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि इतनी तेज आवाज और हॉर्न के बावजूद व्यक्ति पटरी के इतने करीब क्यों था? मृतक के परिजनों ने इस राज से पर्दा उठाया। परिजनों ने बताया कि संजय राउत जन्म से ही मूक-बधिर (बोल और सुन पाने में अक्षम) थे। यही कारण था कि जब वंदे भारत एक्सप्रेस तेज हॉर्न बजाते हुए प्लेटफॉर्म से गुजर रही थी, तो उन्हें खतरे का बिल्कुल भी आभास नहीं हुआ। उनकी सुनने की क्षमता न होने के कारण ट्रेन का शोर उन तक नहीं पहुंचा और एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हुई।
ससुराल जाने के लिए निकले थे घर से
मृतक के छोटे भाई कुंदन कुमार ने बताया कि संजय राउत मंगलवार की सुबह अपने ससुराल जाने के लिए घर से निकले थे। उनका ससुराल बाढ़ अनुमंडल के सकसोहरा थाना क्षेत्र में पड़ता है। वह बख्तियारपुर से ट्रेन में सवार हुए थे, लेकिन संभवतः गलती से वह सकसोहरा जाने के बजाय बाढ़ स्टेशन पहुंच गए।
बाढ़ पहुँचने के बाद भी वह अपने ससुराल नहीं गए। उन्होंने बाजार से कुछ सब्जियां और हॉर्लिक्स खरीदा और वापस अपने घर लौटने की तैयारी में प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार करने लगे। इसी दौरान खैनी बनाने और उसे थूकने की प्रक्रिया में वह प्लेटफॉर्म के किनारे चले गए और काल के गाल में समा गए।
सोशल मीडिया ने पहुँचाई परिजनों तक खबर
हादसे के समय मृतक के पास से कोई पहचान पत्र नहीं मिला था, जिससे रेल पुलिस (GRP) के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। इस बीच हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बुधवार शाम जब यह वीडियो संजय राउत के परिजनों तक पहुँचा, तो घर में कोहराम मच गया। वीडियो और कपड़ों के आधार पर परिजनों ने उनकी पहचान की और गुरुवार सुबह बाढ़ स्टेशन पहुँचे।
रेल पुलिस की कार्रवाई और परिजनों का विलाप
बाढ़ रेल जीआरपी ने बताया कि बुधवार रात तक शव की पहचान नहीं हो सकी थी, इसलिए उसे सुरक्षित रखा गया था। गुरुवार को परिजनों के आने के बाद कागजी कार्रवाई पूरी की गई और पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया। संजय राउत की मौत की खबर से उनके गांव शाहाबाद (नालंदा) में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, विशेषकर यह जानकर कि उनके मूक-बधिर होने की वजह से वे अपनी जान नहीं बचा सके।
रेलवे की अपील: प्लेटफॉर्म पर बरतें सावधानी
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा और सतर्कता के महत्व को रेखांकित किया है। रेल प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि:
-
प्लेटफॉर्म के पीले रंग की पट्टी (Safety Line) से हमेशा पीछे खड़े रहें।
-
हेडफोन लगाकर या मोबाइल में व्यस्त रहकर पटरी के पास न जाएं।
-
चलती ट्रेन के पास थूकने या झांकने जैसी लापरवाही न बरतें।
-
विशेष रूप से दिव्यांग जनों के साथ यात्रा करते समय या उन्हें स्टेशन छोड़ते समय अधिक सावधानी रखें।