सोने की कीमतों में भारी भूचाल: एक ही दिन में ₹14,897 टूटा सोना, ऑल-टाइम हाई से 33% लुढ़का; जानें क्या हैं इस ऐतिहासिक गिरावट के कारण

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BNT Desk: सोमवार को भारतीय सर्राफा बाजार और वायदा बाजार (Futures Market) में एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसकी कल्पना निवेशकों ने शायद ही की होगी। वैश्विक आर्थिक चिंताओं और चौतरफा बिकवाली के चलते सोने की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। महज एक कारोबारी दिन में सोने के दाम 10 प्रतिशत से भी ज्यादा टूट गए, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया है।

यह गिरावट उन लोगों के लिए एक बड़े झटके की तरह है जिन्होंने ऊंचे दामों पर सोना खरीदा था, वहीं नए खरीदारों के लिए यह एक सुनहरे अवसर की तरह देखा जा रहा है।

MCX पर आंकड़ों की जुबानी: भारी गिरावट का गणित

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को सोने के वायदा भाव में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। सोने की कीमतें प्रति 10 ग्राम 14,897 रुपये (10.3%) तक गिर गईं। इस गिरावट के बाद सोना 1,29,595 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आकर टिक गया।

अगर हम इसकी तुलना इस साल के रिकॉर्ड स्तर से करें, तो गिरावट और भी चौंकाने वाली है। इसी साल 29 जनवरी 2026 को सोना अपने अब तक के उच्चतम स्तर 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। तब से लेकर अब तक सोने के दाम करीब 63,501 रुपये कम हो चुके हैं, जो कि इसके रिकॉर्ड हाई से लगभग 33 प्रतिशत की भारी गिरावट है।

क्यों आई सोने में इतनी बड़ी गिरावट?

बाजार विशेषज्ञों और कमोडिटी एनालिस्ट्स के मुताबिक, सोने की कीमतों में इस ‘फ्री-फॉल’ (तेजी से गिरावट) के पीछे कई बड़े वैश्विक और आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं:

  1. वैश्विक स्तर पर बिकवाली (Global Sell-off): दुनियाभर के बाजारों में कीमती धातुओं को लेकर निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली और कैश की कमी को पूरा करने के लिए सोने की भारी बिकवाली की है।

  2. महंगाई की चिंता (Inflation Concerns): वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और इसे नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा उठाए जा रहे कदमों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

  3. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Crude Oil Spike): अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने वैश्विक आर्थिक आउटलुक को प्रभावित किया है। जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने से हाथ खींचने लगते हैं।

  4. डॉलर की मजबूती और मैक्रोइकॉनॉमिक फैक्टर: वैश्विक व्यापक आर्थिक चिंताओं के बीच डॉलर की स्थिति और अन्य संपत्तियों में अस्थिरता ने भी सोने पर दबाव डाला है।

निवेशकों और आम जनता पर क्या होगा असर?

सोने की कीमतों में आई इस 33% की गिरावट का असर बहुआयामी होने वाला है:

  • खरीदारों के लिए मौका: शादियों के सीजन के बीच इतनी बड़ी गिरावट आम जनता के लिए राहत की खबर है। जो लोग सोना खरीदने की योजना बना रहे थे, उनके लिए 1.29 लाख का भाव जनवरी के मुकाबले काफी किफायती है।

  • निवेशकों की चिंता: जिन लोगों ने जनवरी में 1.90 लाख के आसपास निवेश किया था, उन्हें पोर्टफोलियो में बड़ा घाटा दिख रहा होगा।

  • ज्वैलरी इंडस्ट्री: बाजार में अचानक आई इस गिरावट से आभूषण विक्रेताओं के पास ग्राहकों की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन स्टॉक वैल्यू घटने से दुकानदारों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

आगे क्या है विशेषज्ञों की राय?

बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने में अभी और अस्थिरता देखने को मिल सकती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और महंगाई को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लंबी अवधि के लिए सोना हमेशा एक मजबूत संपत्ति रहा है, इसलिए इस गिरावट को ‘करेक्शन’ (सुधार) के तौर पर भी देखा जा सकता है।

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